सहजता से लें रजोनिवृत्ति काल

स्त्री जीवन का महत्वपूर्ण काल रजोदर्शन होता है, जिसमें प्रथम बार 14-15 वर्ष की आयु में उसे रजःस्राव होता है। इससे पहले वह बालिका होती है। रजोदर्शन का तात्पर्य ही है कि स्त्री गर्भधारण योग्य हो चुकी है। ऐसे वक्त कई शारीरिक व मानसिक परिवर्तन होते हैं। प्रत्येक माह वह मासिक धर्म से होती है। यही स्त्रीबीज निर्मिति का…

Read More

हिपेटाइटिस लिवर मे सूजन

लिवर को मानव शरीर का ‘कारखाना’ कहा जाता है, जहां पर खाद्य पदार्थों के रूप में उन कच्ची सामग्रियों को पौष्टिक तत्वों में परिवर्तित करने के लिए प्रसंस्कृत किया जाता है, जिनकी आवश्यकता ऊर्जा प्रदान करने के लिए होती है। इसी के द्वारा हमारे शरीर से अपशिष्ट सामग्री (Waste Products) को बाहर निकाला जाता है। मानव जीवन की गुणवत्ता…

Read More

मधुमेह का त्वचा पर प्रभाव

मधुमेह ऐसी व्याधि है जो शरीर को भीतर ही भीतर नुकसान पहुंचाती है। शरीर के आंतरिक अवयव हृदय, किडनी, आंखें इत्यादि के साथ-साथ त्वचा पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। इसलिए यदि किसी रोगी को त्वचा की समस्या हो तो सबसे पहले वह मधुमेहसे ग्रस्त तो नहीं है यह जांच की जाती है। मधुमेह से ग्रस्त रुग्ण को निम्न…

Read More

वृद्धावस्था में स्वास्थ्य सुरक्षा

वृद्धावस्था मानव जीवन का वह पड़ाव है, जहां व्यक्ति एकान्त में शान्तिपूर्ण जीवन बिता सकता है, उसकी शारीरिक शक्ति भले ही कम हो जाये, किन्तु अगर उसकी मानसिक शक्ति अर्थात इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो वह सभी कार्य कुशलता से कर सकता है। आयु बढ़ना एक स्वाभाविक प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिये इससे बुढ़ापे की हीन भावना नहीं आनी चाहिए किमैं…

Read More

उच्च रक्तचाप आधुनिक जीवनशैली का रोग

हाइपरटेन्शन (उच्च रक्तचाप) पूर्व काल में 40-50 वर्ष के बाद ही होता था, किंतु आज नवयुवकों को भी इसकी शिकायत रहती है। आज के यांत्रिक युग में मनुष्य दिन-रात काम में व्यस्त रहता है, जिससे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य की तरफ उसका ध्यान नहीं रहता। व्यायाम का अभाव, मोटापा, अति महत्वाकांक्षा, होटलों में मिर्च-मसालेदार व अधिक तैलीय पदार्थो का…

Read More

क्या विवाह पूर्व रक्त जाँच आवश्यक है ?

विवाह निश्चित करते समय हम पहले वर वधु की कुंडली मिलाते हैं पर यह उतना आवश्यक नहीं जितना कि परीक्षण । मनुष्य का स्वास्थ्य उत्तम है तो वह आगे का जीवन उत्तम रीति से जी सकता है। पर बीमारी के कारण जीवन की गति थम जाती है। अतः अनुवांशिक रोग पीढ़ी दर पीढ़ी फैलने पर रोग लगाएं और यह…

Read More

विकारों से बचाएं अपनी रीढ़

आधुनिकता की दौड़ में हम परिश्रम से दूर होकर यांत्रिक जीवन जीने लगे हैं। हमारे लगभग हर कार्य में मशीनों का प्रवेश हो गया है। चाहे चटनी बनाने या मसाले पीसने के लिए ग्राइंडर का या फिर कपड़े धोने के लिए वाशिंग मशीन का उपयोग हो, हमें ज्यादा हाथ-पैर हिलाने नहीं पड़ते। पहले महिलाएं सिलबट्टे पर चटनी पीसती थीं,…

Read More

फंगल इन्फेक्शन

फन्गस एक प्रकार का प्लान्ट जैसा आरगेनिज़म है जिसमें क्लोरोफिल नहीं रहता। वह अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकता। अतः वह त्वचा व सॉफ्ट टिशू के पोषक तत्वों पर ही निर्भर रहता है, अतः वे पैरासाइट होते हैं। त्वचा में फंगल इंफेक्शन (Skin Fungal Infection) कई तरह के फफूंदे (Fungi) की वजह से होता है, जिनमें डर्मेटोफाइट्स, कैन्डिडा और…

Read More

सफेद दाग से विचलित न हो

सफेद दाग एक विचलित कर देनेवाला विकार है, पर हर एक सफेद दाग एक सा नहीं होता । सफेद दाग से ग्रसित व्यक्ति हीन भावना का शिकार हो जाता है क्योंकि समाज के लोग उसे कुष्ठ रोग समझकर उसकी उपेक्षा करने लगते है। जबकि कुष्ठ रोग से इसका कोई सम्बन्ध नही है। कुष्ठ रोग में त्वचा से लेकर धातुओं…

Read More

मधुमेह में नपुंसकता

मधुमेह में नपुंसकता

मधुमेह (डायबिटीज) से ग्रस्त रुग्ण में सेक्स निश्चित रूप से प्रभावित होता है। यदि मधुमेह के रुग्ण में रक्त शर्करा नियंत्रण में नहीं हो रही है, तो इसका दुष्प्रभाव अन्य अंगों के साथ जननांगों पर भी पड़ता है। अतः मधुमेह पीड़ित रुग्णों में यह दुष्प्रभाव दिखने पर सबसे पहले रक्त शर्करा की मात्रा को सामान्य करने पर विशेष ध्यान…

Read More