
आज संपूर्ण विश्व में कोरोना वायरस से त्राहि-त्राहि मची हुई है। भारत में कोरोना वायरस के दस्तक देने के साथ ही ये बहस शुरू हो गई कि इस वायरस का उपचार आधुनिक चिकित्सा पद्धति में तो नहीं है सिर्फ लाक्षणिक चिकित्सा दे सकते हैं। विचार किया गया कि क्या इस वायरस से निपटने के लिए कोई वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति हो सकती है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष मंत्रालय के तहत आयुर्वेद तज्ञों की मीटिंग बुलाकर चर्चा की कि जिनकी इम्युनिटी मजबूत है वे इस वायरस से मुकाबला कर सकते हैं। जबकि इम्युनिटी बढ़ाने के लिए आयुर्वेद में वनौषधियों व जीवन शैली का वर्णन है। अतः आयुर्वेद तज्ञों ने इम्युनिटी बढ़ाने में आयुर्वेद की भूमिका को लेकर चर्चा की। हमारे रसोई घर में उपलब्ध अनेक खाद्य वस्तुओं व मसालों से इम्युनिटी बढ़ सकती है ऐसा निष्कर्ष निकाला गया।
सामान्य भाषा में शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति को रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कहते हैं। जिनकी इम्युनिटी कम होती है, ऐसे व्यक्ति मौसम में थोड़ा सा परिवर्तन होने पर भी बीमार पड़ जाते हैं। बच्चों की इम्युनिटी कम होती है, अतः मौसम का प्रभाव उन पर जल्दी पड़ता हैं।
इम्युनिटी क्या है ?
आयुर्वेदानुसार इम्युनिटी को व्याधिक्षमत्व कहते है।
निरूक्ति
व्याधिक्षमत्वम् व्याधिबल विरोधित्वं व्याध्युत्पाद
प्रतिबन्धकत्वमिति याव्त ।। (चक्रपाणि)
शरीर की क्षमता जो व्याधि के बल का विरोध करती है एवं व्याधि उत्पत्ति को रोकती हो, वह व्याधिक्षमता कहलाती है। अतः व्याधिक्षमत्व का पर्याय बल है।
व्याधिक्षमत्व एवं बल की समानता – सुश्रुत आचार्य चिकित्सा स्थान 18 में कहते हैं कि स्वस्थ व्यक्ति को हमेशा बल (शरीर एवं मानसिक) का रक्षण करने का प्रयास करना चाहिये। देह में सुरक्षित बल व्याधि बल को कम करने की क्षमता रखता है। इस विवरण से यह ज्ञात होता है कि बल एवं व्याधिक्षमत्व रोग की ताकत (व्याधि बल) का विरोध करता है। इसी कारण व्याधिक्षमत्व एवं बल को समान / पर्याय माना गया है।
आयुर्वेदिक शास्त्रकारों का मानना है कि ओज’ एवं व्याधि क्षमत्व बल एक है। आयुर्वेदानुसार ओज अर्थात शरीर को धारण करने वाली सात धातुओं का सार भाग या उत्कृष्ट भाग होता हैं।
Immune system has evolved to recognize and eliminate foreign molecules which are invading the healthy system and thus provides optimum defense mechanism against pathogens.
Resistance of body against entry of any pathogenic or foreign agent is known as immunity
इम्युनिटी हमारे शरीर की टॉक्सिन्स से लड़ने की क्षमता होती है। ये टॉक्सिन्स बैक्टीरिया, वायरस, फंगस, पैरासाइट इत्यादि पैथोजिन या कोई दूसरे नुकसानदायक पदार्थ हो सकते है। अगर हमारी इम्युनिटी मजबूत है तो यह हमें न सिर्फ सर्दी और खांसी से बचाती है बल्कि हिपेटाइटिस इत्यादि अन्य इंन्फेक्शन सहित कई बीमारियों से हमारा बचाव होता है।
इम्युनिटी कम होने के कारण
1) वजन कम या ज्यादा होना और मोटापा
2) धूम्रपान या शराब का सेवन अधिक करने वाले
3) पोषक आहार का सेवन न करने से
4) दर्दनिवारक (पेनकिलर) औषधि का अधिक सेवन करने वाले
5) तनाव अधिक होने पर।
6) नींद की कमी या शरीर को उचित आराम न देना
आयुर्वेदानुसार ओजक्षय के कारण
अभिघातात्क्षयात्कोपाच्छोकाद् ध्यानाच्छमात् क्षुधः ।। ओजः संक्षीयते होभ्यो धातुग्रहणनिः सृतम् ।। तेजः समीरितं तस्माद्विस्त्रसयति देहिनः।। (सु.सू 15/28)
ओजः क्षीयेत कोपक्षुद्ध्यान शोक श्रमदिभिः ।। (अ.ह.सू. 11/39)
वात ले मक्षये पित्तं देहौजः स्त्रसयच्चरेत् । ग्लानिमिन्द्रयदौर्बल्यं तृष्णां मूर्च्छा क्रियाक्षयम् ।। (च.सू.17/60)
चोट लगने, धातुओं के क्षय होने, क्रोध करने, शोक, चिन्ता, परिश्रम करने, भूख से वात, कफदोष का क्षय एवं पित्तदोष का प्रकोप होने से ओज का क्षय हो जाता है।
क्षय होने से ग्लानि, इन्द्रिय दौर्बल्य, तृष्णा, मूर्च्छा और शारीरिक क्रियाओं का नाश होता है। ओज का क्षय हो जाता है।
हमारे आसपास कई तरह के पैथोजेंस होते हैं। हमें पता भी नहीं होता और हम खाने के साथ, पीने के साथ यहां तक कि सांस लेने के साथ भी हानिकारक तत्वों को अवशोषित कर लेते हैं। ऐसा होने के बाद भी हर कोई बीमार नहीं पड़ता। जिनका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है वे इन बाहरी संक्रमणों से बेहतर तरीके से मुकाबला करते हैं। हमारी प्रतिरोधक क्षमता कैसी हैं इस बारे में हम ब्लड रिपोर्ट से पता कर सकते हैं लेकिन हमारा शरीर भी हमें कई तरह के संकेत देने लगता है। यदि आप निम्नलिखित तकलीफों से बार-बार परेशान रहते है तो आपकी इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कम हो सकती है।
बार-बार संक्रमण होना या एलर्जी
अगर आपको लगता है कि आप दूसरों की अपेक्षा बार-बार बीमार होते हैं, जुकाम की शिकायत रहती है, खांसी, गला खराब होना या स्किन रैशेज जैसी समस्या रहती है तो संभावना है कि यह आपके इम्यून सिस्टम की वजह से हो। कैंडिडा टेस्ट का पॉजिटिव होना, बार-बार यूटीआई, डायरिया, मसूड़ों में सूजन, मुंह में छाले वगैरह भी अल्प इम्यूनिटी (Low Immunity) के लक्षण हैं।
विटमिन डी की कमी

विटमिन डी इम्युनिटी को बढ़ाता है और ज्यादातर लोगों में इसकी कमी होती हैं। अगर आपकी ब्लड रिपोर्ट में विटामिन डी की कमी हैं तो आपको इसका लेवेल सही करने की हर कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा लगातार थकान, आलस, या ऐसे घाव जो लंबे वक्त तक न भरें, नींद न आना, डिप्रेशन और डार्क सर्कल भी कमजोर प्रतिरोधक क्षमता की निशानी है।
ओजक्षय के लक्षण
तस्य विस्त्रंसो व्यापत् क्षय इति लिंगानि व्यापत्रस्य भवन्ति । त्र्यो दोषा बलस्योक्त व्यापद्विस्त्रसनक्षयाः ।। (सु.सू. 15/29.30)
व्यापद, विस्त्रंस और क्षय ये बल (ओज) के तीन दोष कहे गये हैं
1. विस्त्रंसन के लक्षण:-
सन्धिविश्लेषी गात्रणां सदनं दोषच्यवनं क्रिया सत्रि रोध च विस्त्रसे ।।
सन्धियों का ढीलापन, अंगों में थकान एवं वातादि दोषों का स्थान (प्राकृत स्थान) से भ्रष्ट होना।
2. व्यापत् के लक्षण :-
गुरूत्वं स्तब्धताऽगेषु ग्लानिर्वर्णस्य भेदनम् ।। तन्द्रा निद्रा वातशोफो बलव्यापदि लक्षणम् ।। (सु.सू. 15/25.27)
1. शरीर के अंगों में गुरूता, 2. शरीर स्तब्धता, 3. ग्लानि 4. वर्ण का अन्यथा भाव होना, 5. तन्द्रा, 6. अतिनिद्रा 7. वातिक शोफ,
3. ओज क्षय का लक्षण :-
बिभेत दुर्बलो भीक्ष्णं ध्यायाति व्यथितेन्द्रियः ।
दुच्छायो दुर्मना रूक्षःक्षाम चैवौजसः क्षये।। (च.सू. 17/32)
भयभीत होना, पुनःपुनः चिन्ताग्रस्त होना, इन्द्रिय पीडा, शरीर का वर्ण बदलना यह ओजक्षय का सामान्य लक्षण माना गया है।
ओजक्षय के विशेष लक्षण
मूर्च्छा मांसक्षयो मोह : प्रलापोज्ञानमेव च।
पूर्वोक्तानि च लिंगानि मरणं च बलक्षये। (सु.सू 15/28)
मूर्च्छा, मोह, अज्ञान, मृत्यु, मांस आदि धातुओं के क्षय, प्रलाप, विस्त्रंस एवं व्यापद् के लक्षणों का भी होना।
आयुर्वेद मत
आजकल हॉस्पीटल में आनेवाला हर रोगी यही कहता है कि ऐसी कोई आयुर्वेदिक दवा दीजिए जिससे हमारा इम्युनिटी बढ़ जाए। चूंकि इम्युनिटी मजबूत होगी तो कोरोना नामक बीमारी का डर नहीं रहेगा। हम रोगी को यही समझाते है कि इम्युनिटी केवल दवाई से नहीं बढ़ती बल्कि हमारे आहार-विहार भी इम्युनिटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आहार हमारा संतुलित होना चाहिए। हमारे शरीर में स्थित अग्नि ठीक होनी चाहिए अर्थात आयुर्वेद मत से इम्युनिटी बढ़ाना अर्थात अग्नि चिकित्सा करना हैं।

आयुर्वेद में 13 प्रकार की अग्नि का वर्णन है। 5 प्रकार की भूताग्नि (पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश), 7 धात्वाग्नि (रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा व शुक्र) तथा एक जठराग्नि। यह जठराग्नि अर्थात हमारा पाचन संस्थान / उदर / आमाशय / पेट में स्थित अग्नि जहां भोजन का पाचन होता है। ये अग्नि हमारे शरीर की ऊर्जा है। हम जो भोज्य पदार्थ लेते है वह सबसे पहले जठराग्नि के संपर्क में आता है। यदि हमारा आहार असंतुलित है तो अग्नि पर उसका प्रभाव पड़ता है। पाचन होने के बाद भोज्य पदार्थ का सार व किट्ट भाग बनता है। सार भाग शरीर की सात धातुओं में जाता है व किट्ट भाग मल द्वारा बाहर निकलता है। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए हमारी जठराग्नि, धात्वाग्नि व यकृत का कार्य सुचारू रूप से होना चाहिए। अतः हमारा आहार पोषक होना चाहिए। अग्नि अच्छे से काम करेगा तो इम्युनिटी (ओज) उत्तम रहेगा। अग्नि की वजह से इम्युनिटी मजबूत होता है। अग्नि से ओज (सात धातुओं का सार भाग) उत्तम रहेगा। अग्नि की वजह से इम्युनिटी मजबूत होता है। अग्नि से ओज बढ़ता है। दीर्घायु प्राप्त होता है। अग्नि के उत्कृष्ट होने से हम भीतर से स्वस्थ व स्वच्छ हो जाएंगे।
आयुर्वेद द्वारा इम्युनिटी कैसे बढ़ाएं ?
आयुर्वेदानुसार इम्युनिटी बढ़ाने के लिए दिनचर्या ऋतुचर्या का पालन व पंचकर्म, रसायन का प्रयोग विस्तृत वर्णन किया है। आयुर्वेद में महामारी को लेकर पूरा एक अध्याय लिखा हुआ है जिसमें बताया गया है कि महामारी की उत्पत्ति कब होती है और इसके आने पर हम उससे किस तरह लड़ें। आयुर्वेद की एक खास बात ये है कि इसमें हर व्यक्ति की आयु, खान-पान और उसकी स्थिति को भी ध्यान में रखा जाता हैं। आयुर्वेद में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए च्यवनप्राश का नाम आता हैं। जिसका सेवन कर च्यवन ऋषि युवा हो गए थे। यह च्यवनप्राश हमारे फेफड़ों के लिए बहुत फायदेमंद हैं।
इम्युनिटी बढ़ाने वाले सुपर फूड्स
लहसुन : लहसुन एंटी-एलर्जिक, एंटी-वायरल गुण का है। दिन में एक या दो लहसुन की कली खाने से शरीर में ऐसे एंजाइम्स ऐक्टिवेट होते हैं, जो एलर्जिक रिऐक्शन से बचाने में सक्षम होते हैं।
नींबू : नींबू में पाए जाने वाले विटामिन-सी और ऐंटी-ऑक्सिडेंट से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। यह हर प्रकार की एलर्जी दूर करता है। दिनभर में एक गिलास नींबू पानी पीना ही चाहिए।
हल्दी-अदरक : हल्दी और अदरक में पाया जाने वाला एंटी-ऑक्सिडेंट, एंटीवायरल और एंटी-इंफ्लेमिट्री कंपाउंड एलर्जी से लड़ता है। एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर गरम दूध में और अदरक की चाय भी लाभकारी है।
शकरकंद : शकरकंद में बीटा कैरोटीन, पोटैशियम, मैग्नीशियम और विटामिन बी6 होता है। ये शरीर की सूजन कम करते हैं।
सेब : रोजाना एक सेब खाने से प्रतिरक्षा प्रणाली दुरुस्त रहेगी। आप एलर्जिक रिऐक्शन से बच सकेंगे।
ग्रीन-टी : रोजाना दो कप ग्रीन टी पीने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।
अलसी : इसमें ऐंटी-एलर्जिक सीलियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है। एक चम्मच अलसी के बीज को गरम दूध के साथ पिएं। सलाद, दही के साथ भी खा सकते हैं।
कालीमिर्च : इसमें पाइपेरिन (Piperine) मुख्य घटक होता है। जो शोथ नाशक होने के साथ इम्युनिटी को बढ़ता है। सलाद में इसका सेवन किया जाता है। यह नमक के स्थान पर प्रयोग किया जाता हैं। अध्ययन में पाया गया है कि अदरक लहसुन की पेस्ट के साथ काली मिर्च पीसी हुई लेने से वायरल रोग होने की संभावना कम होती है।
दालचीनी :- यह मुख्यतः अग्निदीपक, रूचिवर्धक, शोथनाशक, एंटीवायरल व इम्युनिटी बढ़ता है। स्त्रोतोरोध (ब्लाकेज) को दूर करने वाली है।
इम्युनिटी बढ़ाने वाला काढ़ा
एक कप पानी में चार तुलसी के पत्ते, दो काली मिर्च, अदरक, दालचीनी और मुनक्का डालकर पानी को उबाल लें। इसे मीठा करने के लिए इसमें गुड़ या शहद भी डालें। इसे दिन में दो बार पीने से शरीर की इम्युनिटी बढ़ती हैं। इसके अलावा हल्दी दूध का भी सेवन करें।
नस्य व गंडूष
आयुर्वेद चिकित्सा शास्त्र में नस्य व गंडूष को इम्युनिटी बढ़ाने में उपयोगी बताया है। नाक में तेल डालने से भी शरीर रोग मुक्त रहता हैं। दोनों नासिका छिद्रों में दो बार तिल तेल डालें यही नस्य हैं। तिल के तेल से कुल्ला 2 बार करने को भी कहा हैं इसे गंडूष कहते है। अगर नैसल मेंब्रेन और माउथ कैविटी लुब्रिकेटेड रहते हैं। तो उससे किसी भी तरह के रोगाणु हमला नहीं कर सकते है।
इम्युनिटी बढ़ाने के उपाय
1) नियमित योगाभ्यास, 2) नियंत्रित वजन, 3) ब्लैक टी या ग्रीन टी का सेवन, 4) आहार में प्रोटीन की मात्रा अधिक लें। उत्तम क्वालिटी का फैट जैसे घी का सेवन करें।
5) मौसमी फलों का सेवन अवश्य करें। ऐसे फल जिनमें जिंक, सेलेनियम व आयरन की प्रचुर मात्रा हो ये इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक है। 6) छोटे बच्चों में मां का दूध (स्तनपान) इम्युनिटी बढ़ाता हैं। 7) 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण गर्म पानी के साथ रात में सेवन करें। 8) 1 चम्मच दशमूल चूर्ण व 1 चम्मच इसबगोल चूर्ण गर्म पानी के साथ रात में लें। 9) प्राणवहस्त्रोतस को स्वच्छ रखने के लिए कफनाशक काढ़ा का प्रयोग सूर्योदय व सूर्यास्त के समय करें। साथ में प्राणायाम अवश्य करें।
10) प्राणवह स्त्रोतस के लिए सोमासव, यष्टीमधु चूर्ण, अगस्त्य हरीतकी, पूष्करमूल आसव, वासावलेह, चित्रक, हरीतकी अवलेह के परिणाम लाभकारी है।
अन्य उपाय स्वास्थ्य वाटिका के 59 अंक में “कोरोना वायरस से डरें नहीं” पेज 24 नंबर में उद्धृत है।
इम्युनिटीवर्धन हेतु कैसा हो आहार ?

1) ऐसा अन्न हो जो अग्नि की शक्ति को बढ़ाए।
2) भोजन ताजा व गरम होना चाहिए।
3) बचा हुआ या बासी खाना न खाएं।
4) गरम पानी, अदरक का पानी अग्नि की शक्ति को बढ़ाकर ऊर्जा देता है।
5) भोजन ऐसा हो जो सहज पचे।
6) दोपहर के समय गरिष्ठ अन्न का सेवन कर सकते है। रात का भोजन हल्का होना चाहिए।
7) आहार में घी का प्रयोग आवश्यकतानुसार करें। घी अग्निवर्धक है।
8) रसोई घर में उपलब्ध कुछ मसाले जैसे हल्दी, अदरक, मरिच, अजवायन, सौंफ, जीरा, धनिया का प्रयोग अवश्य करें।
9) बादाम, दही, खट्टे फल, हरी सब्जियां, पालक, सूखे मेवे, मौसमी फल का नियमित सेवन करने से इम्युनिटी अवश्य बढ़ती हैं।
10) आयुर्वेद में लंघन अर्थात उपवास को औषधि कहा है यहां तक कि बुखार में तो कहा है-
लंघनम् परमौषधं ज्वरम्
अतः आधा दिन का उपवास अग्नि की शक्ति को बढ़ाता है।
पंचकर्म व रसायन चिकित्सा
आयुर्वेद में रसायन चिकित्सा का उल्लेख शास्त्रों में आता है। दरअसल लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए रसायन औषधि का प्रयोग करते है। युवावस्था को टिकाए रखने व शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रसायन चिकित्सा उपयोगी है। इसके गुणों का वर्णन आचायों ने निम्नलिखित श्लोक द्वारा किया है-
दीर्घमायु स्मृति मेधा आरोग्यं तरूणं वयः
अर्थात रसायन सेवन से लंबी आयु, उत्तम स्मरणशक्ति, तीक्ष्ण बुद्धि, उत्तम स्वास्थ्य व युवावस्था प्राप्त होती है। रसायन चिकित्सा के पूर्व पंचकर्म करना आवश्यक है। पंचकर्म अर्थात शरीर शुद्धि या बॉडी सर्विसिंग। इसमें वमन, विरेचन, बस्ति, नस्य, रक्तमोक्षण इन पांच कर्मो का समावेश होता है। पंचकर्म करने के बाद रसायन चिकित्सा लेने से
औषधि शीघ्र लाभ करती है। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए भी शरीर शुद्धि कर रसायन औषधियों का सेवन चिकित्सक के मार्गदर्शन में करें। शतावरी, अश्वगंधा, तुलसी, मुलेठी, शिलाजित, आंवला, गुडुची, हल्दी, पिप्पली, हरीतकी इत्यादि वनौषधियां शरीर में रसायन का काम करती है। अतः इम्युनिटी बढ़ाने में इन वनौषधियों की अहम भूमिका हैं।
क्षीण ओज की चिकित्सा
जीवनीयौषधक्षीरसाद्यास्तत्र भेषजम् ।
ओजोविवृद्धौ देहस्य तुष्टिपुष्टिबलोदयः ।। (अ.ह.सू. 11/41)
जीवनीयगण औषध द्रव्य सेवन, दुग्ध, घृत आदि, हृदय के लिए हितकर आहार सेवन, ओजवर्धक एवं स्त्रोतों को प्रसन्न करने वाले आहार विहार का सेवन करना चाहिए।
इस प्रकार इम्यूनिटी हमारी शरीर को स्वस्थ रखने का आधार है। इसकी कमी होने पर हम स्वस्थ नहीं रह सकते । इसे मजबूत करने के लिए आयुर्वेद में अनेक पहलूओं का वर्णन है जिसका विस्तृत वर्णन इस लेख के माध्यम से किया है। उपरोक्त नियमों का पालन कर हमारी इम्यूनिटी मजबूत होकर हम लंबे समय तक स्वस्थ रहकर रोगों से दूर रह सकते है। इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए आयुर्वेद में वर्णित दिनचर्या ऋतुचर्या का अवश्य पालन करें साथ ही हमारा आहार उत्कृष्ट सादा, सात्विक होना चाहिए।

डॉ. जी. एम. ममतानी
एम.डी. (आयुर्वेद पंचकर्म विशेषज्ञ)
‘जीकुमार आरोग्यधाम’,
238, गुरु हरिक्रिशनदेव मार्ग,
जरीपटका, नागपुर-14


