मधुमेह का त्वचा पर प्रभाव

मधुमेह ऐसी व्याधि है जो शरीर को भीतर ही भीतर नुकसान पहुंचाती है। शरीर के आंतरिक अवयव हृदय, किडनी, आंखें इत्यादि के साथ-साथ त्वचा पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। इसलिए यदि किसी रोगी को त्वचा की समस्या हो तो सबसे पहले वह मधुमेहसे ग्रस्त तो नहीं है यह जांच की जाती है। मधुमेह से ग्रस्त रुग्ण को निम्न…

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उच्च रक्तचाप आधुनिक जीवनशैली का रोग

हाइपरटेन्शन (उच्च रक्तचाप) पूर्व काल में 40-50 वर्ष के बाद ही होता था, किंतु आज नवयुवकों को भी इसकी शिकायत रहती है। आज के यांत्रिक युग में मनुष्य दिन-रात काम में व्यस्त रहता है, जिससे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य की तरफ उसका ध्यान नहीं रहता। व्यायाम का अभाव, मोटापा, अति महत्वाकांक्षा, होटलों में मिर्च-मसालेदार व अधिक तैलीय पदार्थो का…

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क्या विवाह पूर्व रक्त जाँच आवश्यक है ?

विवाह निश्चित करते समय हम पहले वर वधु की कुंडली मिलाते हैं पर यह उतना आवश्यक नहीं जितना कि परीक्षण । मनुष्य का स्वास्थ्य उत्तम है तो वह आगे का जीवन उत्तम रीति से जी सकता है। पर बीमारी के कारण जीवन की गति थम जाती है। अतः अनुवांशिक रोग पीढ़ी दर पीढ़ी फैलने पर रोग लगाएं और यह…

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विकारों से बचाएं अपनी रीढ़

आधुनिकता की दौड़ में हम परिश्रम से दूर होकर यांत्रिक जीवन जीने लगे हैं। हमारे लगभग हर कार्य में मशीनों का प्रवेश हो गया है। चाहे चटनी बनाने या मसाले पीसने के लिए ग्राइंडर का या फिर कपड़े धोने के लिए वाशिंग मशीन का उपयोग हो, हमें ज्यादा हाथ-पैर हिलाने नहीं पड़ते। पहले महिलाएं सिलबट्टे पर चटनी पीसती थीं,…

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सफेद दाग से विचलित न हो

सफेद दाग एक विचलित कर देनेवाला विकार है, पर हर एक सफेद दाग एक सा नहीं होता । सफेद दाग से ग्रसित व्यक्ति हीन भावना का शिकार हो जाता है क्योंकि समाज के लोग उसे कुष्ठ रोग समझकर उसकी उपेक्षा करने लगते है। जबकि कुष्ठ रोग से इसका कोई सम्बन्ध नही है। कुष्ठ रोग में त्वचा से लेकर धातुओं…

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मधुमेह में नपुंसकता

मधुमेह में नपुंसकता

मधुमेह (डायबिटीज) से ग्रस्त रुग्ण में सेक्स निश्चित रूप से प्रभावित होता है। यदि मधुमेह के रुग्ण में रक्त शर्करा नियंत्रण में नहीं हो रही है, तो इसका दुष्प्रभाव अन्य अंगों के साथ जननांगों पर भी पड़ता है। अतः मधुमेह पीड़ित रुग्णों में यह दुष्प्रभाव दिखने पर सबसे पहले रक्त शर्करा की मात्रा को सामान्य करने पर विशेष ध्यान…

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Irretibale Bowel Syndrome (ग्रहणी रोग)

Irretibale Bowel Syndrome

आयुर्वेद में 13 प्रकार के अधारणीय वेगों का वर्णन है शास्त्रानुसार मल के वेग को नियमित रुप से त्याग करना निरोगी शरीर के लिए हितकारी है क्यों कि नियमित मल त्याग होने से मन शांत रहता है। दिन भर सक्रियता, स्फूर्ति, रहती है, कार्य में मन लगता है, एकाग्रता रहती है। पेट में गड़बड़ी, मरोड़, कब्ज, गैस बनना, अपच…

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मिर्गी समुचित उपचार से मुक्ति

प्राचीन काल से मिर्गी का अस्तित्व माना गया है। किन्तु उस काल में मिर्गी के कारणों का ज्ञान नहीं था। इसलिए उसे भूतबाधा या ईश्वर की अकृपा माना जाता था। पर आज वह बात नहीं है। कई अनुसंधान हुए हैं और विज्ञान के नित नए आविष्कारों ने आज मनुष्य की अनेक गलतफहमियों को दूर किया है। आज मिर्गी का…

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Diabetes – Ayurvedic and Panchkarma Treatment

आधुनिक समय में मनुष्य के रहन-सहन व आहार-विहार में जिस तीव्र गति से परिवर्तन हुआ हैं, उससे भारतीय संस्कृति धीरे-धीरे स्वयं की पहचान खोती जा रही है। फास्ट फूड, अति गरिष्ठ भोजन, अति मिष्ठान्न का सेवन, मद्यपान व रासायनिक पेय पदार्थो का प्रचलन तथा व्यभिचार तीव्र गति से बढ़ रहा है। उद्योगों की बढ़ती संख्या, दुपहिया व चौपहिया वाहनों…

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Brain Haemorrhage – Ayurvedic Treatment

आधुनिक प्रतियोगिता के युग ने मनुष्य को मशीनवत बना दिया है, निरंतर काम ही काम, बस आगे बढ़ने की होड़ ! इस अनवरत भाग दौड़ से मनुष्य सदैव तनावग्रस्त रहता है। दिमाग में हमेशा तनाव रहना अर्थात उसका कुछ न कुछ परिणाम शरीर पर होता है, यह तनाव की स्थिति अनेक कष्टों को उत्पन्न कर सकती है। इसी तनाव…

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